कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ; साहस और लीडरशिप की दंतकथा - सतपाल गुर्जर
- सतपाल गुर्जर ( सतपाल जी कर्नल बैंसला के साथ बीस वर्षो से अधिक जुड़े रहे है )
कर्नल साहब की साहस की प्रसंशा का कारण भी यही है की एक साधारण से परिवार में जन्म और एक बहुत ही राजनीतिक और शिक्षा में पिछड़ा हुआ समाज जिसको अपनी ही सोती ही नही, अपनी मस्ती में मस्त समाज को अपनी आखें खोलने पर मजबूर कर दिया और उसी समाज को अपनी आवाज उठाने के लिये खड़ा कर लिया ।
फिर एक एसा आंदोलन जो दुनिया ने देखा । उन व्यक्ति के नेतृत्व में समाज आंदोलन में कभी नही हारा हर आंदोलन में समाज के लिये कुछ ना कुछ लेकर ही हटा । आप ने जाट आंदोलन देखा उसमें भी लोग मारे गये और मिला कुछ नही । किसान आंदोलन भी देश ने देखा बहुत लोग मारे गये परन्तु हासिल कुछ नहीं हुआ.
गुर्जर आंदोलन में मारे गये लोगो को शहीद का दर्जा और पाँच पाँच लाख रुपए की आर्थिक सहायता और हर शहीद के परिवार से एक सरकारी नोकरी दिलाई ।
और शिक्षा की अलख जगाई और कोम को लड़ना सीखा दिया । कर्नल बैंसला को केवल गुर्जर समाज ही नहीं सभी समाज अपना नेता मानते थे ।
कर्नल बैंसला जी की जीवन की अनेकों एसी कहनिया है जहां से उनको आत्म बल मिलता था । वे ईश्वर को तो मानते थे पर पाखंडो के घोर विरोधी थे । कर्नल साहब कर्म में विस्वास करते थे । कर्नल साहब ने जितनी यात्रा समाज के लिए की सोचना भी मुश्किल है । उन्होंने पंद्रह लाख किलोमीटर के लगभग यात्राये की .
कर्नल साहब ने कभी भी किसी का विरोध नहीं किया कोई दुश्मन भी उनके द्वार पर आया तो उनसे भी वही व्यवहार किया जो अपने दोस्तों से करते थे । यही कारण रहा कि कोई भी उनके बारे में कुछ भी बोल देता था । कर्नल साहब कह ते थे हर आदमी ये चाहता है में उनके कहे अनुसार काम करूँ वो कैसे संभव है इसलिए वो मेरे से नाराज़ है । हमने माफ़ करने की अगर महानता देखी तो केवल कर्नल साहब में । इस लिये वो लोक देवता है ।
सतपाल गुर्जर 🙏
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| कर्नल बैंसला और साथी , आन्दोलन के समय कर्नल बैंसला, सतपाल गुर्जर, और श्रीमति सुनीता बैंसला कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला और श्री सतपाल गुर्जर |

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