कर्नल बैंसला ने गुर्जरो को जाति से समाज मे कैसे तब्दील किया
कर्नल बैंसला : जिन्होंने गुर्जरो को जाति से समाज मे तब्दील किया अक्सर जाति और समाज को एक ही समझ लिया जाता है. जबकि इन दोनों ही शब्दों की संकल्पना और अर्थो मे बड़ा अंतर है. आइए देखते है जाति क्या होती है. जाति शब्द आपस मे विवाह करने वाली, समान गुण रखने वाली एक सामूहिक अभिव्यक्ति है. जैसे मनुष्य एक जाति है. वृक्षों और पशुओं की भी जातियाँ होती है. वस्तुओ की भी जातियाँ होती है. असल मे 'कास्ट' शब्द स्पेनिश -पुर्तगाली भाषा से निकला है. जो किसी समूह की समानताओं को दिखाता है. जाति शब्द एक स्थिर और यथा स्तिथि को बताने वाला नीरस, उबाऊ और निर्जीव शब्द है. अब देखते है समाज किसे कहते है. समाज एक ऐसा समूह है जो आपस मे सहयोग करने की क्षमता रखता है. ऐसा समूह जो जीवित और चेतना सम्पन्न है. इस समूह के सदस्य एक दूसरे के लिए सपने देख सकते है. एक दूसरे के लिए सुख और दुख की अनुभूति कर सकते है. इकट्ठा हो सकते है. मिलकर गीत गा सकते है, नाच सकते है. मिलकर लड़ सकते है. मिलकर रचनात्मक निर्माण कर सकते है. ऐसा नही है कि कर्नल बैंसला के गुर्जर आरक्षण आंदोलन से पहले गुर्जर जाति के लोग आपस म...