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कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला इंटरव्यू

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  गहलोत तब तक सोचते हैं जब तक बात बासी न हो जाए खुलकर बोले किरोड़ी सिंह बैसला  गहलोत कुशल प्रशासक, चापलूसों से घिरी रहती हैं वसुंधरा सबकी एक नीति है-डिले, डिफ्यूज और डिनायल त्रिभुवन . जयपुर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत काम तो करते हैं, लेकिन इतना विलंब से कि सब बदमजा (बासी) हो जाता है। हालांकि वे कुशल प्रशासक हैं। वसुंधरा राजे बेईमान सलाहकारों और चापलूसों से नहीं घिरी होतीं तो वे रेयरेस्ट रेयर मुख्यमंत्री होतीं। ये कहना है गुर्जर नेता किरोड़ी सिंह बैसला का। बैसला ने कहा कि वे सिर्फ पांच प्रतिशत आरक्षण चाहते हैं, चाहे कैसे भी दो। पेश हैं उनसे बातचीत के प्रमुख अंश- आपने गहलोत और वसुंधरा राजे दोनों की सरकारों के समय आंदोलन किया। बुनियादी फर्क क्या नजर आया? क्च दोनों सरकारों की एक टिपिकल मोडस आपरेंडी रही है। डिले, डिफ्यूज और डिनायल। देर करो, लटकाओ और हाथ खड़े कर दो। अगर अशोक गहलोत ने वही किया जो हमारे साथ वसुंधरा ने किया तो इस आदमी को भी वहीं जाना होगा, जहां वसुंधरा गईं। वसुंधरा राजे ने आपकी मांग मानी होती तो क्या होता? क्च वसुंधरा राजे ने मेरा कहा माना होता तो वे आज कहीं और होतीं, वहां...